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समय-समय पर किया जाने वाला उपवास स्वास्थ्य पर डालता है सकारात्मक प्रभाव

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समय-समय पर उपवास या IF  करने से मेटाबॉलिज़्म या उपापचय बेहतर होता है। ये उम्र संबंधी रोगों से बचाने में मदद कर सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में छपी रिपोर्ट के अनुसार उपवास करने से व्यक्ति का रक्तचाप ठीक रहता है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर ठीक रहता है और शरीर में इंसुलिन की मात्रा भी सही रहती है। ये रिपोर्ट अलग-अलग मेडिकल जर्नल्स में छपे अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों पर आधारित है।

रिपोर्ट में बताया गया कि दो से चार दिन उपवास रखने से प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर होती है, पुरानी प्रतिरक्षी कोशिकाएँ बाहर निकल जाती है और नई कोशिकाएं तैयार होती हैं।

मानव शरीर रात-दिन चलने वाली लय के अनुसार विकसित हुआ है जिसे आतंरिक घड़ी कहा जाता है। मानव शरीर के मेटाबॉलिज़्म ने दिन के खाने और रात की नींद के हिसाब से अपने आप को ढाल लिया है। लेकिन रात के समय खाने की आदत से लोगों को मोटापे और मधुमेह से पहले होने वाले रोगों का ख़तरा हो गया है।

इस बात को ध्यान में रखते हुए अलबामा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ऐसे मोटे पुरुषों के एक छोटे समूह पर शोध किया जिन्हे मधुमेह से पहले के लक्षण थे। शोधाकर्ताओं ने उन के लिए ऐसे खाने की योजना बनाई जो दिन के पहले आठ घण्टों के लिए एकदम सही था।

हार्ट केयर फ़ाउंडेशन ऑफ़ इण्डिया या एचसीएफ़आई के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि उपवास का मतलब खाने और पानी से दूर रहना ही नहीं है। उपवास का अर्थ नकारात्मक विचारों से दूर रहना भी है। उपवास या व्रत मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है। इस से इन्द्रियों को काबू में रखना आता है और सात्विक जीवनशैली अपनाने में मदद मिलती है यानी अनुशासन और लगन वाली एक ऐसी जीवनशैली जो राजसिक और तामसिक शैली से अलग हो।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने उपवास करना ज़रूरी बताया था। ख़ास तौर से सप्ताह में एक बार और मौसम बदलने के दौरान कार्बोहाइड्रेट खाने से दूर रहना ताक़ि जीवनशैली से जुड़े रोगों से बचा जा सके। डॉ. अग्रवाल के अनुसार सप्ताह में एक बार मेडिकल व्रत रखना ज़रूरी है।

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अग्रवाल ने कहा कि उपवास हमारे लीवर में जमा शक्कर कम करने में मदद करता है। सप्ताह में एक बार एक दिन का उपवास हमारे शरीर को ज़रूरी आराम देता है और उसे साफ़ होने तथा अंदर से मरम्मत करने का मौक़ा भी देता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए सप्ताह में एक बार उपवास रखने से बेहतर कुछ नहीं है।  

क्या सभी कर सकते हैं उपवास?

इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से साबित होता है कि आईएफ़ सेहत सुधारने के लिए एक प्रभावी तरीक़ा है। लेकिन मधुमेह के रोगियों या किसी और गंभीर रोग की दवाएँ लेने वाले व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करवाने वाली माताओं को चिकित्सक की सलाह के बिना आईएफ़ नहीं करना चाहिए।

एचसीएफ़आई के अनुसार उपवास के कुछ टिप्स

  • अगर आप उच्च रक्तचाप या मधुमेह जैसे रोगों से पीड़ित हैं तो अपने भोजन की सही से योजना बनाइए और अपनी दवाएँ लेना ना भूलें।
  • पानी, नारियल पानी, ग्रीन टी, छाछ और नींबू पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • नमकीन चीज़ें ज़्यादा ना खाएँ।
  • अपने खाने में सामान्य नमक की बजाय सेंधा नमक या रॉक सॉल्ट प्रयोग करें क्योंकि ये खनिज अवशोषित करने में सहायक है और उच्च या निम्न रक्तचाप वाले लोगों के लिए भी ये फ़ायदेमंद है।
  • हल्का भोजन खाएँ क्योंकि ये आसानी से पच जाता है।
  • मीठे के रूप में आप खजूर या फल वाली दही खा सकते हैं और इस में चीनी की बजाय शहद मिला लें।
  • ख़ूब सारे ताज़े फल और सब्ज़ियाँ खाएँ।
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