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Medical Research News

Study Reveals: Young Kids Don’t Know That E-Cigarettes Contain Nicotine


A new study has revealed that teenagers are not aware of the fact that E-cigarettes contain nicotine. Research was first of its kind, in which smokers self-reported the use of tobacco products.

Study included 517 adolescents 12 to 21 years old, completed an anonymous questionnaire regarding tobacco, e-cigarette, and marijuana use and provided a urine sample.

Of all, 2.9% reported using tobacco, 14.3% e-cigarettes, and 11.4% marijuana in the past week.

“All e-cigarette users said that their e-cigarette had no nicotine or that they did not know if it contained nicotine”, report states.

Study was done by group of researchers at Stony Brook University, Stony Brook, New York and Roswell Park Comprehensive Center, Buffalo, New York.

“For years, nicotine and marijuana have been among the most popular drugs used by adolescents. Recently, electronic cigarettes (e-cigarettes) have surpassed combusted tobacco in popularity. In this study, many participants were unaware of the nicotine content in their products”, report also stated.

What Is E-cigarette?

E-cigarette is known through different names like “e-hookahs”, “vapes”, “tank systems” and “JUUL”. These products are also knowns as “Electronic nicotine delivery systems (ENDS)”. Companies design them in the form of cigarettes, cigars, USB flash drives or pen.

Juul is currently the most popular electronic cigarette (e-cigarette) with a market share of 49.6% as of January 2018 and year-over-year growth of over 700% based on Nielsen market data.

Why Situation Is Alarming?

Juul is a compact closed system device charged via USB and comes with disposable flavored pods each of which contains 0.7mL with 5% nicotine by weight.

Each pod is nearly equivalent to one pack of cigarettes or 200 puffs according to official Juul documentation, which also states that Juul is specifically ‘designed with smokers in mind’ and is ‘for adult smokers seeking a satisfying alternative to cigarettes’.

Thus, consuming one JUUL pod a day is equivalent to finishing a pack of cigarettes in a day.

In 2018, 20.8% of high school students reported use of e-cigarettes in the past 30 days (National Youth Tobacco Survey, USA), an increase of 78% from 11.7% reported in 2017.

National Youth Tobacco Survey, USA, showed that there were alarming increases in current use of any tobacco product among both middle and high school students between 2017 and 2018, primarily because of an increase in e-cigarette use.

“These products are posing threats and challenges to the public health in India also. According to GATS 2 (Global Adult Tobacco Survey 2016-17) there has been reduction in number of tobacco users in India by about 81 lakhs over a period of last 6-7 years. However, the use of e-cigarettes is increasing” said Dr S. K. Arora, Additional Director Health, Govt of Delhi.

Dr. Arora also said, “Young people are not aware of the health hazards of these products. Moreover, these devices entice them. Vape industry design E-cigarettes attractive, cool and hi-tech. E-cigarettes/Vapes are easy to carry because of their deceptive design and look. One can easily hide such pods from its parents and guardians. Vapes come in different flavours & smartly marketed as less harmful than the traditional tobacco products”.

Why Students Are Using E-Cigarettes More?

National Youth Tobacco Survey, USA, 2016 assessed the reasons of using e-cigarettes by youth. Among those who had ever used an e-cigarette, the most commonly selected reasons for use were:

  • Use by “friend or family member” (39.0%)
  • Availability of “flavors such as mint, candy, fruit, or chocolate” (31.0%)
  • The belief that “they are less harmful than other forms of tobacco such as cigarettes” (17.1%)

Challenges To Control E-cigarettes:

E-cigarettes/Vapes/JUUL are new products in the tobacco market. There has not been any study done on e-cigarettes considering their long-term effects so far. The claim made by Vape industry that e-cigarettes are harmless is objectionable in the absence of long-term study conducted over its effects.

The latest generation of e-cigarettes which have the highest nicotine concentrations to date (59 mg/mL) have become the most widely used products among adolescents.

“The main challenges with such devices are unclear long-term health effects & lack of 100% safety. Some of such devices cause nicotine levels in the blood to peak higher than they do with traditional cigarettes” said Dr Arora.

He further added that advocating e-cigarette as cessation device is also unethical as these are not registered as drug under Drugs & Cosmetic Act of India.

चिकित्सा शोध समाचार

अध्ययन: युवाओं को नहीं है ई-सिगरेट में निकोटिन होने की जानकारी


एक नए अध्ययन से पता चला है कि युवाओं को ये जानकारी नहीं है कि ई-सिगरेट में निकोटिन होता है। ये अपनी तरह का पहला शोध था जिस में धूम्रपान करने वालों ने ख़ुद बताया कि वे तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।

इस अध्ययन में 12 से 21 साल के 517 किशोरों और युवाओं को शामिल किया गया था। इन्होंने बिना नाम बताए तंबाकू, ई-सिगरेट और गांजे के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दिया और साथ ही मूत्र के सेंपल भी उपलब्ध करवाए।

इन में से 2.9 प्रतिशत ने तंबाकू के इस्तेमाल, 14.3 प्रतिशत ने ई-सिगरेट और 11.4 प्रतिशत ने गांजा इस्तेमाल करने के बारे में बताया जो कि अध्ययन से पिछले सप्ताह किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार ई-सिगरेट इस्तेमाल करने वाले सभी युवाओं ने कहा कि उन की ई-सिगरेट में निकोटिन नहीं था या उन्हें नहीं पता था कि उस में निकोटिन है या नहीं।

स्टोनी ब्रूक विश्वविद्यालय, स्टोनी ब्रूक, न्यू यॉर्क और न्यू यॉर्क के Buffalo के Roswell Park Comprehensive Center के शोधकर्ताओं के एक समूह ने ये अध्ययन किया था।

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि कई वर्षों से किशोर पसंदीदा नशे के रूप में निकोटिन और गांजे का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट(ई-सिगरेट) ने लोकप्रियता में जलने वाले तंबाकू को पीछे छोड़ दिया है। इस अध्ययन में हिस्सा लेने वाले बहुत से प्रतिभागियों को उन के उत्पादों में निकोटिन होने की जानकारी नहीं थी।

ई-सिगरेट क्या है?

ई-सिगरेट को कई नामों से जाना जाता है जैसे कि ई-हुक्का, वेप्स, टैंक सिस्टम और JUUL. इन उत्पादों को इलैक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम नाम से भी जाना जाता है। कंपनियाँ इन्हें सिगरेट, सिगार, पेन या यूएसबी फ्लैश ड्राईव के रूप में डिज़ाइन करती हैं।

वर्तमान समय में JUUL जनवरी 2018 तक बाज़ार में 49.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक पसंदीदा इलैक्ट्रोनिक सिगरेट है और Nielsen बाज़ार डाटा के अनुसार हर साल इस में सात सौ प्रतिशत तक की वृद्धि होगी।

ये चौंकाने वाली स्थिति क्यों है?

JUUL एक छोटा बंद उपकरण है जो कि यूएसबी से चार्ज होता है और इस्तेमाल के बाद फेंकने वाले ख़ुश्बुदार हिस्सों या पॉड्स में आता है जिन में 0.7mL निकोटिन होता है जो कि वज़न के पाँच प्रतिशत के बराबर होता है।

JUUL के आधिकारिक लिखित प्रमाण के अनुसार हर हिस्सा लगभग एक पैकेट सिगरेट या 200 पफ़्स के बराबर होता है। इस में ये भी कहा गया है कि Juul ख़ास तौर से धूम्रपान करने वालों को ध्यान में रख कर बनाया गया है और उन बड़े लोगों को भी ध्यान में रखा गया है जो सिगरेट का कोई संतोषजनक विकल्प खोज रहे हैं।

इस तरह एक दिन में एक JUUL पोड या हिस्से का सेवन करना एक दिन में सिगरेट का एक पैकेट ख़त्म करने के बराबर है।

राष्ट्रीय युवा तंबाकू सर्वे, अमरीका के अनुसार  2018 में हाई स्कूल के 20.8 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि उन्होंने पिछले तीस दिनों में ई-सिगरेट का इस्तेमाल किया है जो कि 2017 में बताए गए 11.7 प्रतिशत के मुक़ाबले 78 प्रतिशत की बढ़ौतरी है।

National Youth Tobacco Survey से पता चला कि मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों में  2017 और 2018 के बीच किसी भी तंबाकू उत्पाद का इस्तेमाल बढ़ने जैसी स्थिति चिंताजनक है। इस की मुख्य वजह है ई-सिगरेट का इस्तेमाल बढ़ना।

दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्वास्थ्य निदेशक, डॉ. एस.के. अरोड़ा ने कहा कि ये उत्पाद भारत में भी जन स्वास्थ्य के लिए ख़तरे और चुनौतियाँ पैदा कर रहे हैं। गैट्स 2 (Global Adult Tobacco Survey 2016-17) के अनुसार पिछले 6 से सात सालों में भारत में तंबाकू इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में लगभग 81 लाख तक की कमी आई थी। लेकिन अब ई-सिगरेट का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

डॉ. अरोड़ा ने ये भी बताया कि युवा इन उत्पादों का सेहत पर पड़ने वाला असर नहीं जानते हैं। इतना ही नहीं ये उपकरण युवाओं को लुभाते भी हैं। वेप उद्योग ई-सिगरेट को आकर्षक, उच्च तकनीक वाली और कूल दिखने वाली बनाता है। ई-सिगरेट या वेप्स को कहीं ले जाना भी आसान होता है क्योंकि ये उपकरणों जैसे ही दिखती हैं। कोई भी अपने माता-पिता या अभिभावकों से पॉड्स आसानी से छिपा सकता है। वेप्स अलग-अलग ख़ुश्बुओं में भी आते हैं और बहुत चालाकी से इन की मार्केटिंग में इन्हें अन्य पुराने तंबाकू के उत्पादों से कम ख़तरनाक बताया जाता है।

छात्र ई-सिगरेट का अधिक इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?

National Youth Tobacco Survey, USA, 2016 में युवाओं द्वारा ई-सिगरेट के इस्तेमाल के कारणों का आंकलन किया गया। जिन्होंने कभी भी ई-सिगरेट का इस्तेमाल किया है उन के अनुसार आम तौर पर इस्तेमाल के कारण थे:

  • “दोस्त या परिवार के सदस्य द्वारा इस्तेमाल” (39.0%)
  • “पुदीने, कैंडी, फल या फिर चॉकलेट जैसे स्वाद में मिलना” (31.0%)
  • ये माना जाना कि “ये तंबाकू के अन्य उत्पादों जैसे कि सिगरेट वग़ैरह से कम हानिकारक हैं।”(17.1%)

ई-सिगरेट को नियंत्रित करने की चुनौतियाँ:

ई-सिगरेट/वैप्स/JUUL तंबाकू बाज़ार में नए उत्पाद हैं। ई-सिगरेट के लंबे समय में पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए अभी तक कोई अध्ययन नहीं किया गया था।

वेप उद्योग का दावा था कि ई-सिगरेट से नुक्सान नहीं होता। लेकिन ई-सिगरेट के दीर्घकालीन प्रभावों को ध्यान में रखे बिना इस के बारे में वेप उद्योग का दावा स्वीकार करने लायक नहीं है।

नई ई-सिगरेट का किशोर ख़ूब इस्तेमाल कर रहे हैं और इन में निकोटिन की अभी तक की सबसे अधिक मात्रा है (59 mg/mL)

डॉ. अरोड़ा का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती है कि ये कहा नहीं जा सकता कि इस तरह के उपकरणों का सेहत पर लंबे समय में क्या असर पड़ेगा और ये 100 प्रतिशत सुरक्षित हैं या नहीं। इस तरह के कुछ उपकरण ख़ून में निकोटिन की मात्रा पारम्परिक सिगरेट से भी ज़्यादा बढ़ा देते हैं।


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