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यौन संचारित संक्रमण के प्रति दिन दस लाख नए मामले: विश्व स्वास्थ्य संगठन

Sexually Transmitted Infections

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जब बीस साल की कॉलेज छात्रा, रोशनी कुमारी(परिवर्तित नाम) को जननांग में संक्रमण हुआ तब स्त्रीरोग विशेषज्ञ ने उसे बताया कि रोशनी को यौन संचारित संक्रमण(STD) हो गया है।

रोशनी उस समय अपनी चिकित्सक के पास पहुँची थी जब वो विवाह से पहले गर्भवती हो गई थी और गर्भपात करवाना चाहती थी।

दिल्ली के Mother’s Lap IVF केन्द्र से IVF विशेषज्ञ और चिकित्सा निदेशक, डॉ. शोभा गुप्ता ने बताया कि इस मरीज़ (रोशनी) का मामला साफ़ तौर से असुरक्षित यौन संबंध का मामला है। जाँच से पता चला कि उसकी ट्यूब STD की वजह से बंद हो गई है। संक्रमण के शुरुआती समय में वो किसी विशेषज्ञ के पास नहीं गई इस लिए उसका मामला और भी पेचीदा हो गया।

जून 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक ऑनलाईन जारी किए बुलेटिन में कहा है कि हर रोज़ यौन संचारित संक्रमण के औसतन दस लाख से अधिक मामले सामने आते हैं।

2016 में 15 से 49 वर्ष की महिला और पुरुषों में पूरी दुनिया में सिफ़लिस, जननांग में संक्रमण, गनरीअ या पेशाब की जगह पर जलन, बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण जैसे अन्य यौन संचारित संक्रमण के ठीक हो सकने वाले लगभग 376.4 मिलियन नए मामले सामने आए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन में लाईफ़-कोर्स और वैश्विक स्वास्थ्य कवरेज के कार्यकारी निदेशक, डॉ. पीटर सालामा ने कहा कि यही सही समय है जब सभी स्थानों पर इन दुर्बल रोगों के उपचार और इनसे बचाव के लिए ज़रूरी सेवाओं तक हर किसी की पहुँच बनाने के लिए संगठित प्रयास किए जाने चाहिए।

भारत में STD के मामले:

डॉ. गुप्ता ने कहा कि लोग ये बात स्वीकार नहीं करते कि वे असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं। मैं कॉलेज के छात्रों और युवाओं में भी ऐसे मामले देखती हूँ। ऐसे बहुत से मामले हैं। सामाजिक दबाव की वजह से युवा अपनी समस्या विशेषज्ञ को नहीं बता पाते।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में यौन संचारित संक्रमण के बहुत मामले होते हैं जिन्हें अनदेखा कर दिया जाता है। Chlamydia या सिफ़लिस जैसे संक्रमण तो निष्कि्रय संक्रमण हैं यानी इनका कोई लक्षण दिखाई नहीं देता और इसलिए इन पर ध्यान भी नहीं जाता।

हालांकि gonorrhoea संक्रमण के लक्ष्ण होते हैं। इन संक्रमणों से मरीज़ की ट्यूब प्रभावित होती है और ये गर्भ धारण करने की प्रक्रिया पर बुरा असर डालते हैं।

नई दिल्ली के Infertility और IVF Nurture क्लिनिक में परामर्शक, डॉ. अर्चना धवन बजाज ने कहा कि Chlamydia संक्रमण भारत में आमतौर पर होता है और इसकी वजह है असुरक्षित यौन संबंध, निरोध या कॉडम का इस्तेमाल ना करना और एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखना। हमें लोगों को इसके बारे में और अधिक जागरूक करने के लिए शिविर लगाने चाहिए और सक्रीनिंग कैम्प भी लगाने चाहिए। Chlamydia से जननांग और मूत्र संबंधी संक्रमण होते हैं। यौन संचारित संक्रमण की वजह से मरीज़ के लिए गर्भधारण करना बहुत मुश्किल होता है।

नई दिल्ली के BLK अस्पताल में आंतरिक चिकित्सा प्रमुख, डॉ. आर.के. सिंघल ने कहा कि भारत में युवा यौन संचारित संक्रमण की अपनी समस्या किसी को नहीं बताते क्योंकि वे अपने यौन संबंधों के बारे में बात नहीं करना चाहते। जब एक मरीज़ को पहले से ही संक्रमण होता है तो नवजात बच्चे को भी संक्रमण होने और जीवन का ख़तरा बना रहता है। हमें इस विषय पर लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि सिफ़लिस की वजह से नवजात बच्चे को जन्म के समय से ही कई रोग हो सकते हैं। कुछ मामले तो जानलेवा भी होते हैं और शिशु को अँधापन, मस्तिष्क को नुक़्सान पहुँचना और गुर्दे ख़राब होने जैसी समस्या भी हो सकती है। लगभग हर चौथे या पाँचवे  IVF मरीज़ में हमें यौन संचारित संक्रमण की वजह से ट्यूब बंद मिलती है। इसकी वजह से बार-बार गर्भधारण करने पर गर्भपात हो जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार यौन संचारित संक्रमण बढ़ने से HIV का ख़तरा हो सकता है:

यौन संचारित संक्रमण सबसे अधिक संक्रामक संक्रमण है जिससे पूरी दुनिया में लोगों का स्वास्थ्य और जीवन प्रभावित होता है।

प्रबलता और व्यापकता के आँकड़े, कार्यक्रम तैयार करने और उसका मूल्यांकन करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और साथ ही STI रोकने और HIV महामारी के विज्ञान में आए बदलावों को समझने में भी मदद करते हैं।

STI की वजह से जननांग से जुड़ी बहुत ही जटिल समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। Chlamydia और Gonorrhoea की वजह से थोड़े समय या लंबे समय के लिए जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं जिनमें पेल्विक या पेडू की सूजन, अस्थानिक गर्भधारण, बच्चा पैदा न कर सकना, पेल्विक में पुराना दर्द और जोड़ों का दर्द शामिल है और ये संक्रमण गर्भावस्था या बच्चे के जन्म के समय भी हो सकता है।

सिफ़लिस की वजह से वयस्कों में तंत्रिका संबंधी रोग, दिल का रोग या चर्मरोग होता है और शिशुओं में स्टिलबर्थ, नवजात शिशु की मृत्यु, समय से पहले जन्म या कोई बड़ी अक्षमता हो सकती है।

ये चारों संक्रमण एचआईवी होने और इसके संक्रमण का ख़तरा बढ़ा देते हैं। इतना ही नहीं जिन लोगों को यौन संचारित संक्रमण होता है उन्हे अक़्सर लिंग आधारित हिंसा, ख़राब व्यवहार, शर्म और सामाजिक बुराई जैसे ख़राब अनुभव भी होते हैं।

मई 2016 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने यौन संचारित संक्रमणों को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र नीति, 2016-2021 अपनाई थी। इस नीति में 2030 तक STI को समाप्त करने के लिए सेवाओं और हस्तक्षेप को जन स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी माना गया है।

यौन संचारित संक्रमण के कुल मामले:

सन् 2016 में 15 से 49 वर्ष के महिला और पुरुषों में दुनिया भर में chlamydia के 127.2 मिलियन नए मामले, gonorrhoea के 86.9 मिलियन मामले, trichomoniasis के 156.0 मिलियन मामले और सिफ़लिस के 6.3 मिलियन मामले सामने आए।

हैरानी की बात ये है कि रिपोर्ट में STI की इतनी अधिक संख्या तब है जब यौन संचारित संक्रमण या मूत्र संबंधी समस्या का इलाज करवा रहे, STI से जुड़ी समस्या की वजह से स्त्रीरोग विशेषज्ञ या यौन स्वास्थ्य क्लिनिक में जाने वाली महिलाओँ और समलैंगिक पुरुषों या यौन कर्मियों के पास जाने वाले पुरुषों के अध्ययन शामिल नहीं किए गए हैं।

विश्व बैंक के वर्गीकरण के अनुसार निम्न आय वाले देशों, राज्यक्षेत्रों और इलाक़ों में सिफ़लिस, gonorrhoea और trichomoniasis रोग बहुत अधिक पाए जाते हैं और उच्च मध्यम आय वर्ग वाले देशों, राज्यक्षेत्रों और इलाक़ों में  chlamydia बीमारी अधिक पाई जाती है।

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